कहते थे सरदार जिसको
जिसने माँ के अंग बचाएं
होने ना दिया तितर-बितर इसको
इसने अपनी जो कमर थी कसली
चाहे बात हो असली या नकली
हर हाल में इसने राह बनाया
एक भारत करके दिखाया
नदियों का इसने रुख है मोड़ा
समय को भी पीछे छोड़ा
भविष्य को सोच कर्म किया ऐसा
भारत को अपना धर्म दिया ऐसा
की आजादी का स्वाद चखे हम
अपनी माँ को सवार सके हम
एक मौका हो जरूर हमारे हाथ
ताकि लिख पाए एक नया इतिहास
जिसने माँ के अंग बचाएं
होने ना दिया तितर-बितर इसको
इसने अपनी जो कमर थी कसली
चाहे बात हो असली या नकली
हर हाल में इसने राह बनाया
एक भारत करके दिखाया
नदियों का इसने रुख है मोड़ा
समय को भी पीछे छोड़ा
भविष्य को सोच कर्म किया ऐसा
भारत को अपना धर्म दिया ऐसा
की आजादी का स्वाद चखे हम
अपनी माँ को सवार सके हम
एक मौका हो जरूर हमारे हाथ
ताकि लिख पाए एक नया इतिहास